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आज के युग में शिक्षक मिलना तो संभव, लेकिन सद्गुरू मिलना दुर्लभ
इंदौर। शिक्षक और गुरू मिलना संभव है लेकिन आज के युग में सद्गुरू मिलना दुर्लभ है। शिक्षक बच्चों के एक समूह को किताबी शिक्षा देता है जबकि गुरू वह होता है जिसे शिष्य चुनते हैं। सद्गुरू हमें मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।
ये विचार हैं शिक्षाविद् डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव के, जो उन्होने अ.भा. कायस्थ महासभा की इंदौर इकाई के तत्वावधान में यशवंत निवास रोड़, चंद्रगुप्त सिनेमाघर के सामने स्थित होटल दिव्य पेलेस में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह में व्यक्त किये।
महासभा के प्रदेश महामंत्री रत्नेश श्रीवास्तव, महिला अध्यक्ष वीना सक्सेना, एवं युवा इकाई के प्रदेशाध्यक्ष विशाल सक्सेना भी अतिथि के रूप मंे उपस्थित थे। प्रारंभ में कार्यक्रम संयोजक श्रीमती सुनीता सक्सेना, सह संयोजक विजय सक्सेना, एवं जिलाध्यक्ष सुशील निगम ने अतिथियों का स्वागत कर सम्मानित होने वाले शिक्षकों के परिचय दिये।
इस अवसर पर 30 ऐसे शिक्षकों का सम्मान किया गया, जो सरकारी सेवा के साथ साथ समाज और आसपास के बच्चों को भी निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं।
समारोह में सुरेश अजनबी, सत्येन्द्र श्रीवास्तव, अजय सिन्हा, आभा कुलीन, सुरेश कानूनगो, रश्मि सक्सेना, संध्या श्रीवास्तव, प्रभा सक्सेना, ममता सक्सेना, मनोज श्रीवास्तव सहित समाज के विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रबुद्धजन भी विशेष रूप से उपस्थित थेे। अंत में साधना सक्सेना ने आभार माना।


